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When this terrorism will end ?

ये आतंकवाद कब खत्म  होगा ? भारत की एकता, अखंडता एवं सम्प्रुभता ही इसकी शान है। इस भारत देश को सुरक्षित रखने के  लिए न जाने कितने ही लोग शहीद हुए न जाने कितने ही लोगों ने अपने प्राण त्याग  दिए। देश की इन बहादुरों के वजह से ही हम महफूज है। हाल ही में हुए पुलवामा अटैक में हमारे देश के 42 सी. आ. र. पी. एफ. जवान शहीद हुए । इस घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया । पूरे देश ने जवानों को श्रद्धांजलि दी और पूरा देश एकजुट हो गया । आतंकवादी कब तक हमारे देश के खिलाफ ऐसा कायरतापूर्ण हरकतें करते रहेंगे । आखिर कब तक ऐसा ही चलता रहेगा । कब तक हमारे देश के जवान यूँ ही शहीद होते रहेंगे। कब वो माहौल आएगा की हमारे देश के लोग बिना खौफ के जी  सकें और बॉर्डर पर खड़े हमारे जवान भी सुरक्षित रहें। हमारा पड़ोसी देश कब तक ऐसा हरकतें करते रहेगा। अब शांति से कुछ नहीं होने वाला है। भारत ने हमेशा ही शांति से बात सुलझाने की कोशिश की है। वो कहते हैं न की " लातों के भूत  बातों से नहीं मानते " वैसे ही हमारे पड़ोसी देश को भी विश्व से अलग - थलग करना होगा।पाकिस्तान पर दबाव बनाना होगा जिस...

Exam results will not matter in your life

 परीक्षा परिणाम असल जीवन में मायने नहीं रखते  नमस्कार मित्रों आज ये पोस्ट उन सभी लोगों  के लिए है जो परीक्षा परिणाम को लेकर चिंतिंत रहते है। अक्सर हमारे माता-पिता , अध्यापक हम पर दबाव बनाते है की हम परीक्षा में प्रथम आये।  परन्तु क्या स्कूल या कॉलेज लाइफ में प्रथम आने वाले बच्चें असल जिंदगी में भी सफल होते हैं ? जी नहीं ऐसा बिलकुल नहीं है की जो बच्चे स्कूल या कॉलेज लाइफ में प्रथम आते है वो असल जिंदगी में भी सफल हो इस बात की कोई गारंटी नहीं है। असल जिंदगी में आपके परीक्षा में कितने अंक आये ये आपसे कोई नहीं पूछेगा। जिंदगी के इम्तेहान में ये मायने नहीं रखता की आप स्कूल या कॉलेज लाइफ में प्रथम आते थे नहीं, पर इसका मतलब ये बिलकुल नहीं है की आप मेहनत करना छोड़ दे आपको अपनी तरफ से पूरा प्रयास करना होगा। बस आपको अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़नी है। क्या करें हमें यह याद रखना  चाहिए की हम जो भी काम करे उसे पूरी श्रद्धा से करें।  यदि आप किसी परीक्षा में सफल नहीं हुए तो इसका मतलब ये बिलकुल नहीं है की आगे भी आप असफल होंगे। आज हमारे सामने...

Patience is the key of Success

धैर्य सफलता की कुंजी है अक्सर हम जीवन की परिस्तिथियों से हार कर घुटने टेक लेते हैं। कभी-कभी हमारा मनोबल इतना गिर जाता है की हमें  हर ओर सिर्फ निराशा ही दिखाई देती है।आज के वक़्त में हमारे पास धैर्य के बहुत कमी है, जमाना भी वही है इंस्टेंट चीजों का, लेकिन असली मजा तो धैर्य रखने में होता है हमे हर चीज तुरंत चाहिए होती है इंतजार करना तो हमने सीखा ही नहीं है। आपने महसूस किया होगा कि जैसे ही हमारा मन धैर्य की नींव पर टिक जाता है, वैसे ही उसका भटकाव खत्म हो जाता है। जाहिर है कि हम जो अपना आन्तरिक संतुल खोते हैं, वह इसलिए खोते हैं, क्योंकि हमारा मन भटक जाता है।  हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि हमारे धैर्य का सीधा संबंध न केवल हृदय और मन से ही होता है, बल्कि हमारी चेतना से भी होता है। आपने महसूस किया होगा कि यदि आप हड़बड़ी में पढ़ाई करते हैं, तो चीज़ें अच्छी तरह समझ में नहीं आतीं। आपका अनुभव रहा होगा कि हड़बड़ी में किये गये काम अक्सर गड़बड़ा जाते हैं क्योंकि वो कहते है न की " जल्दी का काम शैतान का " । किसी काम को करने में चाहे कितना भी वक़्त लगे पर उसे हमेशा ...

The biggest disease - What people will say ?

सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग ? हम अपने जीवन में खुद से ज्यादा दूसरों के बारे में सोचते है। हमारे ज्यादातर फैसले इस बात पर निर्भर करते है की लोग क्या कहेंगे ? यदि हम दूसरों  के बारे  खुद के बारे में  सोचे तो ज्यादा खुश रह  सकेंगे। कई बार हम अपने सपने या शौक यही सोच कर छोड़ देते है की लोग सुनेंगे तो क्या कहेंगे ? हमारे जीवन की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि हम कोई काम शुरू करने से पहले ही इस असमंजस या दुविधा में पड़ जाते हैं कि हमारे काम की दशा, दिशा, मार्ग, सफलता या असफलता पर लोगों की प्रतिक्रिया क्या होगी। ऐसे में तयशुदा लक्ष्य व उसकी प्राप्ति के मार्ग से भटक जाना हमारी नियति बन जाती है।   ईश्वर ने हमें  एक पूरी स्वतंत्र इकाई के रूप में धरती पर भेजा है – सम्पूर्ण कौशल, व्यक्तित्त्व , शरीर व बुद्धि के साथ  इसलिए हमें  लक्ष्य व मार्ग दोनों स्वयं ही तय करने हैं अपने विवेक से  न की दुसरों के कहने से। बहरे मेढंक की कहानी मेढकों का एक झुंड जंगल घूमने निकला। सैर करते-करते दो मेढक एक गहरे गड्ढ़े में गिर गए। ...

One day's Patriotism

एक दिन  की देशभक्ति  शायद  आप ये सोच रहे  होंगे    की ये दिन की  देशभक्ति क्या है ? तो ये वो देशभक्ति है जो 15 अगस्त या 26 जनवरी को पैदा होती है और अगले ही दिन गायब  हो जाती है।  ये हमारे देश का कड़वा सच  है  की ज्यादातर लोग अब एक दिन के देशभक्त बन कर रह गए है।   कल से ही मोबाईल पर मेसेज आने शुरू हो ग ए  थे और आज तों इन्बोक्स भर गया। कोई शहीदों की दुहाई दे रहा है तो कोई आज़ाद भारत की उपलब्धिया गिना रहा है। कुछ लोग शर्म के मारे मेसेज कर रहे थे क्यूँकि वो रोज डे, फलाना डे, ढिमका डे सबको विश करते है और कुछ तो केवल इसलिए मेसेज कर रहें  है की उन पर आरोप न लगे की वो देशभक्त नही है। वो भी  समय था जब हर व्यक्ति के अंदर सच्चा देशभक्त हुआ करता था। आज के इस आधुनिक समाज को न जाने क्या हो गया है।  देशभक्ति तो बस इतिहास के पन्ने में दफ़न  हो कर रह गयी है। अगस्त या जनवरी भी बाजार के  लिए किसी दिवाली से कम नहीं है आपको बाजार  में न  जाने  क्या क्या बिकता नजर आएगा। ...

The reason behind farmer's suicide in India

 भारत के किसान आत्महत्या करने को क्यों मजबूर है ? भारत एक कृषि प्रधान देश है यह तो हम सब जानते हैं। एक महाशक्ति बनने की और अग्रसर भारत की सबसे बड़ी सकती  कृषि। 2011 के  आकड़ो के अनुसार भारत में लगभग 61.5% आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप  से कृषि पर निर्भर है।  लेकिन इसे हमारा दुर्भाग्य ही कहा जायेगा की जिस देश में कभी "जय जवान जय किसान " के नारे लगे हो उसी देश में आज हर 3० मिनट में एक भारतीय किसान आत्महत्या कर रहा है और जितना अनाज पैदा होता है उसका आधे से ज्यादा ही बर्बाद होता है। आप खुद ही सोचिये यदि किसान इसी तरह आत्महत्या करते रहेंगे तो इस देश का भविष्य क्या होगा ? बिना अन्न के आप कैसे जियेंगे ? किसानों  का हमारे जीवन में बहुत बड़ा योगदान है।  परन्तु  भारत में किसानों  की स्थिति बिगड़ती जा रही है। भारत में किसानों की आत्महत्या के कारणों में विद्वानों ने मानसून की विफलता, जलवायु परिवर्तन, उच्च ऋण बोझ, सरकारी नीतियों, मानसिक स्वास्थ्य, व्यक्तिगत मुद्दों और पारिवारिक समस्याओं जैसे कई कारण बताए हैं। आइए विश...

How to fight with lonliness?

अकेलेपन को कैसे दूर करें  ? कभी कभी हम खुद को बहुत अकेला महसूस करने लगते है।  हमे ऐसा लगता है की हमारी  बात सुनने वाला इस दुनिया में कोई नहीं है। और इसी अकेलेपन की वजह से हम अंदर ही अंदर घुटने लगते हैं और लोगो से मिलना जुलना भी बंद कर देते है। हम अपने आस-पास ऐसा माहौल बना लेते है की हमे किसी से बात करना या हँसी मजाक करना अच्छा  नहीं लगता। हम अपने चारों  और एक सुरक्षा कवच बना लेते है और वास्तविक  दुनिया से बिलकुल अलग हो जाते हैं।  यदि आप भी खुद को अकेला महसूस करते हैं  या फिर आपको भी ऐसा लगता है की आपको पूछने वाला  इस दुनिया में कोई नहीं है तो यह  लेख आपके लिये ही है। क्या करें?  कहीं  टहलने निकल जाएं  आपने लिए थोड़ा सा समय निकलें  ताकि उसमें  आप  अपने अकलेपन के कारणों  को ढूंढ सके।  इसलिए जब भी आप खुद को अकेला महसूस करें तो कही भी टहलने जाएं या अपनी मनपसंद जगह पर चले जाएं  चाहे वो चाय पीना हो या शॉपिंग करना या फिर  चाहे वो 😃 मोमोस खाने जाना हो। सूरज की रोशनी क...