सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग ? हम अपने जीवन में खुद से ज्यादा दूसरों के बारे में सोचते है। हमारे ज्यादातर फैसले इस बात पर निर्भर करते है की लोग क्या कहेंगे ? यदि हम दूसरों के बारे खुद के बारे में सोचे तो ज्यादा खुश रह सकेंगे। कई बार हम अपने सपने या शौक यही सोच कर छोड़ देते है की लोग सुनेंगे तो क्या कहेंगे ? हमारे जीवन की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि हम कोई काम शुरू करने से पहले ही इस असमंजस या दुविधा में पड़ जाते हैं कि हमारे काम की दशा, दिशा, मार्ग, सफलता या असफलता पर लोगों की प्रतिक्रिया क्या होगी। ऐसे में तयशुदा लक्ष्य व उसकी प्राप्ति के मार्ग से भटक जाना हमारी नियति बन जाती है। ईश्वर ने हमें एक पूरी स्वतंत्र इकाई के रूप में धरती पर भेजा है – सम्पूर्ण कौशल, व्यक्तित्त्व , शरीर व बुद्धि के साथ इसलिए हमें लक्ष्य व मार्ग दोनों स्वयं ही तय करने हैं अपने विवेक से न की दुसरों के कहने से। बहरे मेढंक की कहानी मेढकों का एक झुंड जंगल घूमने निकला। सैर करते-करते दो मेढक एक गहरे गड्ढ़े में गिर गए। ...