एक दिन की देशभक्ति
शायद आप ये सोच रहे होंगे की ये दिन की देशभक्ति क्या है ? तो ये वो देशभक्ति है जो 15 अगस्त या 26 जनवरी को पैदा होती है और अगले ही दिन गायब हो जाती है। ये हमारे देश का कड़वा सच है की ज्यादातर लोग अब एक दिन के देशभक्त बन कर रह गए है। कल से ही मोबाईल पर मेसेज आने शुरू हो गए थे और आज तों इन्बोक्स भर गया। कोई शहीदों की दुहाई दे रहा है तो कोई आज़ाद भारत की उपलब्धिया गिना रहा है। कुछ लोग शर्म के मारे मेसेज कर रहे थे क्यूँकि वो रोज डे, फलाना डे, ढिमका डे सबको विश करते है और कुछ तो केवल इसलिए मेसेज कर रहें है की उन पर आरोप न लगे की वो देशभक्त नही है।
वो भी समय था जब हर व्यक्ति के अंदर सच्चा देशभक्त हुआ करता था। आज के इस आधुनिक समाज को न जाने क्या हो गया है। देशभक्ति तो बस इतिहास के पन्ने में दफ़न हो कर रह गयी है। अगस्त या जनवरी भी बाजार के लिए किसी दिवाली से कम नहीं है आपको बाजार में न जाने क्या क्या बिकता नजर आएगा। 15 अगस्त या 26 जनवरी भी बाजार के लिये किसी दिवाली से कम नहीं आपको बाजार मे छोटे -बड़े तिरंगे, तिरंगे के रंग वाली पतंगे और न जाने क्या क्या स्वतन्त्रता दिवस के नाम पर बिकता नजर आ जायेगा। सुबह से ही लोग व्हाट्सप्प , फेसबुक पर स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते नजर आएंगे। हर कोई हाथ मे तिरंगा लिए घूमता रहता है..... खैर वो भी क्या करें दिखावे का जमाना है ।
एक दिन जा कर ऐसे कार्यक्रम में शिरकत करना कोई देश भक्ति नही केवल दिखावा है, ढकोसला है। अपने अंदर के देश भक्त का गला तो हम पहले ही घोट चुके है...फिर किस बात का आज़ादी का जश्न ? उल्टा ऐसा कर हम उन शहीदों का और उनकी शहादत का अपमान कर रहे है। हमारे नेताओं को भी देशभक्ति ऐसे ही मौकों पर याद आती है। ऐसे ही दिन शहीदों की तस्वीरें निकाली जाती है उन पर मालायें चढाई जाती है , देशभक्ति के राग अलापे जाते है।
उसके बाद शहीदों की ये तस्वीरें किसी कोने में धूल खाती रहती हैं। इनकी सुध तक नही ली जाती। ये कैसी देशभक्ति है, केवल शहीदों के नाम पर स्मारक बनवाना और उस पर माला चढाना ही काफी नहीं है। जिस तरह माली की हिम्मत नहीं कि वो फूल खिला दे, उसका काम तो पौधे के लिये उचित माहौल तैयार करना है… उसी तरह हमें मिलकर देशप्रेम का ऐसा माहौल तैयार करना होगा की सबके मन में देशभक्ति रूपी फूल हमेशा खिलता रहे। ये नेता और देश के सभी देशवासी आजादी के असली मायनों को समझें और हम भी समझें तभी ये आजादी हमारे लिये सार्थक होगी।
शायद आप ये सोच रहे होंगे की ये दिन की देशभक्ति क्या है ? तो ये वो देशभक्ति है जो 15 अगस्त या 26 जनवरी को पैदा होती है और अगले ही दिन गायब हो जाती है। ये हमारे देश का कड़वा सच है की ज्यादातर लोग अब एक दिन के देशभक्त बन कर रह गए है। कल से ही मोबाईल पर मेसेज आने शुरू हो गए थे और आज तों इन्बोक्स भर गया। कोई शहीदों की दुहाई दे रहा है तो कोई आज़ाद भारत की उपलब्धिया गिना रहा है। कुछ लोग शर्म के मारे मेसेज कर रहे थे क्यूँकि वो रोज डे, फलाना डे, ढिमका डे सबको विश करते है और कुछ तो केवल इसलिए मेसेज कर रहें है की उन पर आरोप न लगे की वो देशभक्त नही है।
वो भी समय था जब हर व्यक्ति के अंदर सच्चा देशभक्त हुआ करता था। आज के इस आधुनिक समाज को न जाने क्या हो गया है। देशभक्ति तो बस इतिहास के पन्ने में दफ़न हो कर रह गयी है। अगस्त या जनवरी भी बाजार के लिए किसी दिवाली से कम नहीं है आपको बाजार में न जाने क्या क्या बिकता नजर आएगा। 15 अगस्त या 26 जनवरी भी बाजार के लिये किसी दिवाली से कम नहीं आपको बाजार मे छोटे -बड़े तिरंगे, तिरंगे के रंग वाली पतंगे और न जाने क्या क्या स्वतन्त्रता दिवस के नाम पर बिकता नजर आ जायेगा। सुबह से ही लोग व्हाट्सप्प , फेसबुक पर स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते नजर आएंगे। हर कोई हाथ मे तिरंगा लिए घूमता रहता है..... खैर वो भी क्या करें दिखावे का जमाना है ।
एक दिन जा कर ऐसे कार्यक्रम में शिरकत करना कोई देश भक्ति नही केवल दिखावा है, ढकोसला है। अपने अंदर के देश भक्त का गला तो हम पहले ही घोट चुके है...फिर किस बात का आज़ादी का जश्न ? उल्टा ऐसा कर हम उन शहीदों का और उनकी शहादत का अपमान कर रहे है। हमारे नेताओं को भी देशभक्ति ऐसे ही मौकों पर याद आती है। ऐसे ही दिन शहीदों की तस्वीरें निकाली जाती है उन पर मालायें चढाई जाती है , देशभक्ति के राग अलापे जाते है।
उसके बाद शहीदों की ये तस्वीरें किसी कोने में धूल खाती रहती हैं। इनकी सुध तक नही ली जाती। ये कैसी देशभक्ति है, केवल शहीदों के नाम पर स्मारक बनवाना और उस पर माला चढाना ही काफी नहीं है। जिस तरह माली की हिम्मत नहीं कि वो फूल खिला दे, उसका काम तो पौधे के लिये उचित माहौल तैयार करना है… उसी तरह हमें मिलकर देशप्रेम का ऐसा माहौल तैयार करना होगा की सबके मन में देशभक्ति रूपी फूल हमेशा खिलता रहे। ये नेता और देश के सभी देशवासी आजादी के असली मायनों को समझें और हम भी समझें तभी ये आजादी हमारे लिये सार्थक होगी।


Nowadays national unity and national integrity has become very less.
ReplyDeleteOnce we were united for our freedom but now we are divided for nothing.