Skip to main content

Spread Happiness on this Holi

इस होली खुशियाँ बिखेरें
होली का त्यौहार आते ही बाजारों में रौनक छा जाती है। हर ओर सिर्फ रंग और पिचकारी की ही दुकानें  दिखाई देती है। कहते है की त्यौहार खुशियां लेकर आते है  पर  गरीबों के लिए ये त्यौहार सिर्फ उन्हें नीचा  दिखाने के लिए आते हैं। जिनके पास खाने  को दो  वक़्त  की रोटी न हो वह त्यौहार कैसे मनाएंगे। हम तो बस अपने और अपने परिवारवालों के खुशियों के बारे में सोचते है , कभी आप खुद को उनकी जगह पर रख कर देखिये आप अंदाज़ा नहीं लगा सकते की आपको कितना दुख होगा। इतने दुःख सहने की  बाद भी न  जाने वो लोग कैसे मुस्करा लेते हैं ? न जाने इतनी हिम्मत उन्हें कौन देता है ?
अमीर लोग लाखों पैसे उड़ाते है पर  गरीबों के बारे में  कोई नहीं  सोचता है। आप के एक कदम से कई बच्चें खुश हो सकेंगे। आप जितना हो सके उतना खुशियां बाँटें। आप के एक सजोते से प्रयास से किसी एक भी चेहरे पर मुस्कान आ गयी तो जरा सोचिये वो आपको कितनी दुआएँ देंगे वो दुआ अमूल्य होगी। अपने बारे में तो सभी सोचते है इस बार दूसरों के बारें में भी सोच कर देखिए एक पल के लिए आप अपनी  सारी तकलीफें सारे गम भूल जायेंगे। इस होली दूसरों के चेहरे पर भी मुस्कान लाएं और अपना अनुभव कमेंट सेक्शन में जाकर  जरूर बताएं।


क्या करें
  • कुछ वक़्त निकल कर आस पास के गरीब लोगों के साथ भी होली खेलने जाएँ। चाहे तो आस -पास के किसी वृद्धाश्रम या अनाथालय में जाएँ। जाते वक़्त उनके लिए गुझिया, मिठाई , पकवान आदि ले जाना न भूलना। 
  • गुझिया  या अन्य मिठाईयाँ गरीबों या अन्य गरीब सब्जीवालों और ठेलेवालों को दें।
  • घर में जो  भी पहनने लायक पुराने कपड़े हो उन्हें भी दें। 
  • यदि कोई मांगने वाला मिले तो हो सके तो उसे नाश्ता अथवा भरपेट भोजन करवाएँ। 
  • जितना हो सकें पानी न बर्बाद करें होली खेलने  के लिए सिर्फ अबीर- गुलाल आदि का प्रयोग करें। 
  • यदि आप सक्षम है तो अपनी श्रद्धानुसार नए कपड़ें( महंगे हो या सस्ते )  गरीब बच्चों को दें।  

Comments

Popular posts from this blog

Childhood is recalling

बचपन बुला रहा है  पलटे जब जीवन के पन्ने  लगा की मानो बचपन बुला रहा है।  पापा की ऊँगली पकड़ के चलना , वो उड़ती तितलियाँ को पकड़ना , पापा का दौड़  कर साइकिल सीखाना ये सब याद आ रहा  है। खोला जब स्कूल की यादों के पन्ने तो लगा बचपन के साथियों का  जत्था बुला रहा है।  वो भी क्या दिन थे  जब हम बालू के ढेर में घरोंदे बनाया करते थे , कहीं  भी सोते पर आँख खुलने पर खुद को बिस्तर पर ही पाते , जब चाँद का पीछा करते और सोचते की चाँद हमारे साथ-साथ क्यों चल रहा है , फलों के बीज खा कर सोचते की हमारे पेट में ही न पेड़ उग जाये।  बचपन के वो पल फिर याद आ रहे है जब न रोने की वजह थी न हंसने का बहाना था न सुबह के खबर थी न शाम का ठिकाना था , थक कर आना स्कूल से पर खेलने भी जाना था न कल की चिंता न भविष्य  के सपने । बहुत याद आता हैं  वो दिन जब माँ पीछे भागा करती थी लेकर  दूध का गिलास , वो माँ का  लोरियां गा  कर सुलाना  , वो जरा सी बात पर झगड़ना , वो शक्तिमान के लिए भाई से लड़ना और रिमोट का खींचत...

Suicide is not a solution to failure

आत्महत्या नहीं है असफलता का हल  हम सभी अपने जीवन  में सफल होना चाहते है, पर हम में से कुछ लोग असफल हो जाते है। लाख कोशिशों करने के बावजूद कुछ लोगों को असफलता का सामना करना पड़ता है। जीवन में असफल तो हम सब होते परन्तु इसका अर्थ यह नहीं की  हम हार मान ले और अवसाद (डिप्रेशन) में चले जाये। अवसाद एक धीमे ज़हर की तरह होता है जो धीरे-धीरे अंदर से आपके शरीर को खोखला करता जाता है । भारत में लगभग हर साल  13,50,00 लोग आत्महत्या करते है जो पूरी दुनिया में होने वाली आत्महत्याओं का 17% है।  अकसर इन आत्महत्याओं का कारण करियर में असफलता , धोखा  आदि होता है।  तो यदि आप भी अवसाद से ग्रस्त है या आपके मन में भी आत्महत्या के ख्याल आते है तो ये लेख आपके लिए है। आपका जीवन अमूल्य है कई बार में हमारे जीवन में ऐसे मोड़ आते है जब हमे सही रास्ता नजर नहीं आता।  हमे  लगता है की किसी को हमारी परवाह नहीं है और हम अकेले है। हम यह सोचते है की हमारा इस दुनिया में कोई नहीं है या किसी को हमारी जरुरत नही है।  पर यकीन मानिये की ऐसे बहुत से लोग ज...