बचपन बुला रहा है
पलटे जब जीवन के पन्ने लगा की मानो बचपन बुला रहा है। पापा की ऊँगली पकड़ के चलना , वो उड़ती तितलियाँ को पकड़ना , पापा का दौड़ कर साइकिल सीखाना ये सब याद आ रहा है। खोला जब स्कूल की यादों के पन्ने तो लगा बचपन के साथियों का जत्था बुला रहा है। वो भी क्या दिन थे जब हम बालू के ढेर में घरोंदे बनाया करते थे , कहीं भी सोते पर आँख खुलने पर खुद को बिस्तर पर ही पाते , जब चाँद का पीछा करते और सोचते की चाँद हमारे साथ-साथ क्यों चल रहा है , फलों के बीज खा कर सोचते की हमारे पेट में ही न पेड़ उग जाये।
बचपन के वो पल फिर याद आ रहे है जब न रोने की वजह थी न हंसने का बहाना था न सुबह के खबर थी न शाम का ठिकाना था , थक कर आना स्कूल से पर खेलने भी जाना था न कल की चिंता न भविष्य के सपने ।
बहुत याद आता हैं वो दिन जब माँ पीछे भागा करती थी लेकर दूध का गिलास , वो माँ का लोरियां गा कर सुलाना , वो जरा सी बात पर झगड़ना , वो शक्तिमान के लिए भाई से लड़ना और रिमोट का खींचतान में टूटना, वो चाचा - चौधरी कि किताबें लाना और स्कूल से आते ही कॉमिक्स में जुट जाना , वो स्कूल न जाने का झूठा बहाना बनाना ।
कभी स्कूल जाने से डरते थे आज अकेले दुनिया घूम लेते है। पहले फर्स्ट आने के लिए पढ़ते थे अब पैसों के लिए पढ़ते है। पहले छोटी सी चोट लगने पर रो लेते थे अब दिल टूटने पर सम्भल जाते है। पहले लड़ना मनाना रोज का काम था आज एक बार जुदा हुए तो रिश्ते खो जाते हैं। सचमें जिंदगी ने बहुत कुछ सीखा दिया जाने क्यों इतना बड़ा बना दिया। जब छोटे थे तो बड़े होने की बड़ी चाहत थी पर अब पता चला की अधूरे अहसास और टूटे सपनों से , अधूरे होमवर्क और टूटे खिलौने ज्यादा बेहतर थे।
लाख कोशिशें कर के भी हम अपना बचपन वापस नहीं ला सकते पर अपने अंदर के बच्चे को जिन्दा रख सकते है तो कोशिश करिये की आपके अंदर का बच्चा जीवित रहे और समय-समय पर अपने पसंदीदा काम करते रहिये , हफ्ते में एक दिन अपने लिए निकालिये और दोहरा लीजिये वो बचपन के खेल , और करिये वो शौक पूरे जो जीवन की इस दौड़ में पीछे छूट गए है ।


क्या बाते कहि है। बचपन के वो पल याद आऐगे कल।
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteजीवन मे खुश रहने के लिए हमेशा बचपन को याद रखना चाहिये
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